Friday, 27 June 2014


बारिशों में बह गयी कागज की नाव...



बारिशों में बह गयी कागज की नाव
लादकर अधूरी ख्वाहिशें।
कहीं डूब जाएगी तो डूबे ।
मुझे अभी अंजुरी में संभालनी हैं
नयी बारिश की नयी बूँदें ।
जिन्दगी मेरे पास पाने को बहुत कुछ है
और मुस्कुराने को बहुत कुछ है
लो आज फिर पाया खुद को
जब भुलाया खुद को..!

लौटते रास्ते भी सुकून देते हैं...!!
बारिश....बरस आज जमकर
कि नाच लूँ आज मैं भी जमकर
मिला लूँ आँख बिजलियों से
घटा के सामने डटूँ मैं तनकर
चलूँ अब भींग लूँ....
भारी बादल दूर गये...
हल्के घन बरस रहे
प्यासे मन सरस रहे...
शुक्रिया जिन्दगी...
शुक्रिया वर्षा...!!!

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